क्यूँ ना हम भी गुलाब हो जायें

Updated: Mar 14, 2020


इस गुलाब के नायाब गुलाब आने में हर बार बहुत समय लेते हैं । लेकिन एक अजीब एकता है इस पौधे में आने वालों फूलों की भी। ये जब भी आते हैं, एक साथ ही आते हैं । और इन्हें साथ देख , मुझे बहुत खुशी मिलती है। मेरे कहने का मतलब जो है तुम समझ रही हो ना । मेरे बिना तुम्हारे, तुम्हारे बिना मेरे कदम किसी भी राह को ना जायें । क्यूँ ना हम भी, ऐसे ही गुलाब हो जायें । जहाँ भी रहें, जहाँ भी जायें तुम और मैं एक साथ, चलें, चलते जायें । ©अभिषेक भार्गव

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